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केदारनाथ से महापण्डित की यात्रा।

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इस लेख का शीर्षक लेख पूर्ण होने के बाद बदलना पड़ा। लेख पूर्ण होने के उपरांत सहसा लगा कि इस महान विभूति ने जीवन पर्यंत को प्राथमिकता दी है तो शीर्षक भी यात्रा आधारित होना चाहिए।  आज  आपका   परिचय   हिन्दी   साहित्य   के   उस   मूर्धन्य   साहित्यकार   से   कराने   जा   रहा   हूँ   जिसका   नाम   केदारनाथ   पांडे   था   लेकिन   प्रसिद्धि   हुई   राहुल   सांकृत्यायन   के   नाम   से।  बाद में उन्हें महापंडित की उपाधि से अलंकृत किया गया। इनका  जन्म  9 अप्रैल को  आज़मगढ़   ज़िले   में   हुआ।   सांकृत्यायन को   भारत   में   यात्रा   वृतांत   विधा   के   पितामह   के   रूप   में   भी   जाना   जाता   है   और   इन्हें  30  से   भी   अधिक   भाषाओं   का   ज्ञान   था।  इनकी   १३०   से   अधिक ...

बहुत दूर, कितना दूर होता है...

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  मैं बहुत पहले ठोकर खा कर गिर चुका   था। जो बाद में उठकर भागा , वो मैं नहीं था।                 मानव कौल रचित "बहुत दूर , कितना दूर होता है " जब स्मृति जी ने उपहार स्वरूप भेजा तो मैं थोड़ा था अचकचाया   क्योंकि पुस्तक के   पृष्ठ   पर जिस व्यक्ति का चित्र था वो व्यक्ति मुझे देखा-देखा सा लग रहा था। फिर सहसा याद आया कि ये तो "तुम्हारी सुलू" फिल्म (वही "बन जा तू मेरी रानी" गाना फेम) के अभिनेता है। आप यकीन कीजिए तब तक मुझे नहीं मालूम था कि उन महोदय का नाम मानव कौल है और तिस पर यह कि ये नामी लेखक हैं जिनकी 3 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।  " बहुत दूर , कितना दूर होता है" से पहले मानव की   "ठीक तुम्हारे पीछे , “ प्रेम   कबूतर” और “तुम्हारे बारे में” पहले प्रकाशित हो चुकी हैं ।     " बहुत दूर , कितना दूर होता है" लेखक की 2019 में की गई एकल यूरोप यात्रा   का   यात्रा व्रतांत   है। पुस्तक कि शुरुवात दो बच्चों के एक लघु वार्तालाप से होती है और फिर पूरी पुस्तक आपको लंदन से शुरू ...