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वह फिर नहीं आई : भगवती चरण वर्मा

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 यह लघु उपन्यास भगवती चरण वर्मा द्वारा रचित है जिसका प्रकाशन राजकमल समूह ने किया है। प्रथम बार प्रकाशन 1960।  भगवती चरण वर्मा किसी भी परिचय के मोहताज नहीं हैं और आपके द्वारा रचित प्रसिद्ध   चित्रलेखा पर पहले भी मैंने एक लेख लिखा हुआ है।  इस लघु उपन्यास में पुनः लेखक ने नारी और उसके अंतर्मन को समझने और समझाने का प्रयास किया है। उपन्यास में सिर्फ तीन पात्र  हैं श्यामला , ज्ञानचंद और जीवन दास ।  ज्ञानचंद जो कि  एक धनाढ्य व्यापारी है, को श्यामला से प्रेम हो जाता है। कहानी के मध्य में जब ज्ञानचंद के खातों में जीवनराम गबन कर देता है तो उसे जानकारी होती है की श्यामला जीवन राम की पत्नी है। यह बहुत ही आश्चर्यजनक प्रतीत होता है की ज्ञानचंद श्यामला का शारीरिक उपभोग करता रहा और ये जान कर भी जीवनदास ने कभी प्रतिकार नहीं किया।  एक सम्पन्न व्यक्ति कैसे सरकारी तंत्र, न्यायतंत्र और अपने रसूख का उपयोग करके तंत्र का उपयोग अपने हिट में कर सकता है ये देखने को मिलता है।  जीवनराम को जेल भेजने के उपरांत और जीवनराम का यह कथन की यदि उसने उनके पैसों का गबन किया ह...